क्या KGF का मतलब जानते हैं आप:KGF Chapter 2

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KGF-Chapter-2

KGF Chapter 2:

KGF Chapter 2 की सफलता किसी से छुपी नहीं है covid महामारी के बाद KGF Chapter 2 इकलौती ऐसी फिल्म है जो सबसे बड़ी हिट गई है। box office collection की बात करें तो मात्र 10 दिनों में फिल्म ने 800 करोड़ का आंकड़ा पार कर दिया है। फिल्म में तो रॉकी KGF जीत लेता है पर असल में क्या है KGF ? क्या है KGF की कहानी?
KGF का मतलब है Kolar Gold fields.

KGF Chapter 2 Cast:

प्रशांत नील के निर्देशन में बनी KGF Chapter 2 में यश (Yash) अहम भूमिका में हैं उसके साथ-साथ संजय दत्त (Sanjay Dutt), रवीना टंडन (Raveena Tandon) और श्रीनिधि शेट्टी (Srinidhi Shetty) भी अहम किरदारों में है। Directed by: Prashanth Neel,Written by: Prashanth Neel,Produced by: Vijay Kiragandur
Starring: Yash, Sanjay Dutt, Raveena Tandon, Srinidhi Shetty , Prakash Raj.

सोने की खदान जो बेंगलुरु से 100 किलोमीटर की दूरी पर और चेन्नई से 150 किलोमीटर की दूरी पर है। एक वक्त था जब भारत का 95% सोना KGF से ही निकलता था। भारत सोना प्रोड्यूस करने में दुनिया में छठवें स्थान पर पहुंच गया था। ये भारत का पहला और एशिया का दूसरा शहर था जहां बिजली शुरू हुई थी। साथ ही साथ यह दुनिया का दूसरा सबसे गहरा सोने की खदान भी हैं।

केजीएफ का इतिहास -History of KGF

Ganga dynasty ने हजार साल पहले KGF की खोज की थी।अंग्रेज जब भारत आए तो ब्रिटिश सरकार के लेफ्टिनेंट जॉन वारेन ( John Warren) ने चोला वंश (chola dynasty) के बारे में सुना था कि लोग हाथ से सोना खोदते थे। इससे प्रभावित होकर वारेन ने गांव वालों से कहा कि जो इस खदान से सोना दिखाएगा उसे इनाम दिया जाएगा। ईनाम पाने के लालच में ग्रामीण लेफ्टिनेंट वारेन के सामने मिट्टी से भरी एक बैलगाड़ी ले आए। वारेन के सामने जब ग्रामीणों ने पानी से मिट्टी को धोया तो उसमें सोने के निशान नजर आए। उस वक्त वॉरेन को करीब 56 किलो सोना निकला था। 1804 से 1860 तक काफी जांच-पड़ताल की गई लेकिन कुछ खास नहीं किया गया। इस शोध के कारण कई लोगों की जान चली गई। जिसके चलते वहां खुदाई पर रोक लगा दी गई थी।

1871 में शोध एक बार फिर से शुरू हुआ माइकल फिट्जगेराल्ड लेवेली एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सैनिक जो न्यूजीलैंड से भारत आया था 1804 में ‘एशियाटिक जर्नल’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट को पढ़ने के बाद कोलार गोल्ड फील्ड्स को लेकर बहुत उत्साहित था। उसने सोचा कि क्यों न इसे शुरू किया जाए। लेवेली ने बैंगलोर में रहने का फैसला किया। 1871 में लेवेलिन ने बैलगाड़ी से लगभग 100 किलोमीटर की यात्रा की। यात्रा के दौरान लेवल ने खनन स्थलों की पहचान की और सोने के भंडार खोजने में सफल रहे।

लेवली ने दो साल की खोज पूरी करने के बाद मैसूर के महाराजा की सरकार से 1873 में कोलार में खनन करने के लिए लाइसेंस मांगा। 2 फरवरी 1875 को लेवेली को खनन करने का लाइसेंस मिल गया लेकिन माइकल लेवेली के पास ज्यादा पैसा नहीं था इसलिए उन्होंने एक निवेशक की तलाश की और खनन का काम एक बड़ी ब्रिटिश कंपनी जॉन टेलर एंड संस के हाथों में आ गया। उनका ज्यादातर समय पैसे जुटाने और लोगों को काम करने के लिए तैयार करने में बीता था। आखिरकार KGF से सोना निकालने का काम शुरू हुआ।

1902 आते-आते KGF से भारत का 95% सोना निकलने लगा। इंजीनियरिंग उपकरणों का इस्तेमाल करके 121 सालों में 900 टन सोना KGF से निकाला गया।

• खनन के दौरान जाती थी मजदूरों की जान
खनन में खुदाई करने वाले मजदूर अक्सर खुदाई करते वक्त निकलने वाले जहरीले ससायनाइड (cyanide) गैस के संपर्क में आने से अपनी जान को देते थे। मजदूर सोने की खुदाई के लिए बनाए गए शार्प के बीच में जाया करते थे। इसके किनारे लकड़ी का सपोर्ट रहा करता था लेकिन कर कई बार खुदाई करने के दौरान मजदूरों की जान चली जाती थी।

• 1956 से KGF पर सरकार का नियंत्रण
1930 में कोलार गोल्ड फील्ड में करीब 30 हजार मजदूर काम करते थे। KGF में जब सोने का भंडार घटने लगा तो मजदूर भी कोलार से निकलने लगे। हालांकि आजादी तक KGF पर अंग्रेजों का कब्जा था, लेकिन आजादी के बाद 1956 में केंद्र सरकार ने इसे अपने हाथों में लेने का फैसला किया।

और अधिकांश खदानों का स्वामित्व राज्य सरकारों को सौंप दिया गया था। भारत के 95% सोने का उत्पादन करने वाली खदानों को बंद होने से बचाने के लिए राष्ट्रीयकृत किया गया था। 1979 तक काफी नुकसान हो चुका था और वे मजदूरों की मजदूरी तक नहीं दे पा रहे थे। 2001 में कोलार गोल्ड फील्ड्स को बंद कर दिया गया था।

मोदी सरकार (Modi government) ने KGF खोलने के दिए संकेत

2001 में बंद होने के बाद KGF 15 साल तक ठप रहा। साल 2016 में मोदी सरकार ने KGF में दोबारा काम शुरू करने के संकेत दिए थे। साल 2016 में KGF की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के लिए टेंडर मांगा गया था।

KGF की वर्तमान स्थिति
एक वक्त था जब KGF को भारत का इंग्लैंड कहा जाता था। सोने की खुदाई की वजह से अंग्रेजों ने यहां बहुत विकास किया, रोड बनवाई, हॉस्पिटल बनवाएं, और तो और क्लब हाउस भी बनवाई पर आज ना वहां बिजली है और ना ही पीने को भरपूर पानी। 2001 के बाद केजीएफ खंडहर जैसा हो गया है। सोना निकालने वाली सुरंग पानी से भर चुकी है। आज भी लोग मानते हैं कि KGF में इतना सोना है जिसको निकालने से देश पर पड़ने वाले बोझ कम हो सकते हैं।
आशा है इस बार सोने की चमक के आगे मजदूरों की जान का सौदा नहीं होगा।

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