Homeसियासतआरक्षण आर्थिक आधार पर या जाति के आधार पर ?

आरक्षण आर्थिक आधार पर या जाति के आधार पर ?

Agra News: 21 वी शदी में भी भारत के युवाओ को आरक्षण का सामना करना पड रहा है । 74 साल के बाद भी आरक्षण की प्रथा कई क्षेत्रों में चली आ रही है । क्या इतने वर्षो बाद भी भारत देश की जनता को आरक्षण की आवश्यकता है । किन लोगो को आरक्षण की सबसे ज्यादा जरूरत है और कब तक है । ऐसे ही कई सारे सवाल हमारे देश के उन युवाओ को परेशान कर रहे है जो काबिल होते हुए भी इस आरक्षण के अभिशाप की बजह से पीछे रह जाते है ।

भारत में आरक्षण आजादी से पहले से चला आ रहा है नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े वर्ग की जातियों में समानता लाने के लिए आरक्षण लागू किया गया था । आरक्षण का आरम्भ आजादी से पूर्व 1902 में महाराज चौहान साहू ने किया था उन्होंने अपने राज्य में पिछड़े वर्ग की जाति में समानता लेन के लिए आरक्षण का आरम्भ किया था । उसके बाद ब्रिटिश राज द्वारा 1909 में भारत देश में सरकारी नौकरीओं में कई प्रकार के आरक्षण की सुरुवात हुई और इसी तरह आरक्षण देश वासिओ की नज़र में आया । इसी के चलते डॉ. B.R अम्बेडकर ने समाज मई एकता लाने के लिए और पिछड़े वर्ग की जातिओं को सहयोग देने के लिए आरक्षण को 10 साल के लिए लागू किया ।

डॉ. B.R अम्बेडकर ने आरक्षण अच्छे इरादों से लागू किया था क्यूंकि उस समय हमारे देश मैं गरीब और गरीब होते जा रहे थे। पिछड़े जाति के लोगो को दवाया जा रहा था। देश के ऐसे हालातों को देखते हुए डॉ. B.R अम्बेडकर ने 10 साल के लिए आरक्षण लागु करने का फैसला किया ।
डॉ. B.R अम्बेडकर ने आरक्षण केवल 10 वर्षो के लिए लागू किया था लेकिन हमारे देश मैं आरक्षण के नाम पर राजनीति होने लगी नेता इसी के नाम पर वोट मांगने लगे और ये आरक्षण जो एक वरदान के रूप मैं लाया गया था आज अभिशाप बन चुका है उन छात्रों के लिए जो पूरी मेहनत से पढ़ाई करके अच्छे मार्क्स लाते है लेकिन उनसे कम मार्क्स वाला कम पढ़ाई करने वाला छात्र जिसे आरक्षण प्राप्त है प्रतिभावान छात्र की जॉब खा जाता है ।

कई वर्गों के लिए आरक्षण धमका चमका I

पर सामान्य वर्ग के काबिलो का दर्द इसमे छलका II

सर्वोच्च न्यायाल के निर्णय के अनुसार 50 प्रतिसत से ज्यादा आरक्षण किसी को भी प्रदान नहीं किया जा सकता लेकिन राजिस्थान की तरह कुछ राज्यों मैं 68 प्रतिसत तक आरक्षण की मांग की गयी है , अगर सभी तरह के कोटे ऐड कर दिए जाएँ तो लगभग 60 से 70 प्रतिसत सीटों पर आरक्षण लगा हुआ है इस तरह एक सामान्य जाति का व्यक्ति आगे बढ़ ही नहीं सकता केहनो को समानता है लेकिन एक काबिल इंसान को पीछे खींचा जा रहा है और एक नाकाबिल को जबरदस्ती आगे बढ़ाया जा रहा है । ऐसे कितने हे लोग होंगे जिन्होंने फर्जी जस्तावेज बनवा के आरक्षण का लाभ लिया होगा ।

ये आरक्षण की माया है , एक सी सूरत एक सी सीरत ।

एक सा खून के सी काया है, फिर भी आरक्षण लाया है ।।

पढ़ पढ़ कर हार गया नंबर भी मेरे ज़्यदा है , कम नंबर ला कर भी वो उच्च पद पाया है ।

एक सा देश एक सा भेश गरीबी मेरी ज्यादा है , फिर भी आरक्षण का हक़ उसने क्यों पाया है ।।

आरक्षण चाहिए बोलकर सरकारों को बरगलाया है , सरकार ने भी इसी आरक्षण को माध्यम बना के वोट पॉलिटिक्स चलाया है ।

इतनी कोशिश कर ली फिर भी , inequality को और बढ़ाया है ।

अब तो संभल जाओ क्यों कि हम युवाओ ने इस बार बराबरी का मतलब समझाया है ।।

 

By: Areeba Khan

आरक्षण ख़त्म करना कोई बड़ा काम नहीं है लेकिन राजनैतिक दाल कभी नहीं चाहते की ये ख़त्म हो क्यों कि यही तो उनका सबसे बड़ा वोट बैंक है । पिछड़ी जाति के कुछ व्यक्ति वर्तमान मैं उच्च पदों पर है और कुछ काफी धनवान है करोड़पति अरबपति है लेकिन फिर भी वो और उनके बच्चे आरक्षण सुविधाओं का लाभ उठा रहे है । ऐसे संपन लोगो के लिए ये सुविधाएं कहा तक न्यायोचित है । कब तक चलेगा ऐसा कब तक सामान्य वर्ग के गरीब बच्चो के हक़ का गाला घोंटा जायेगा । डॉ। B.R अंम्बेडकर ने खुद कहा था कि हर 10 साल मैं यह समीक्षा हो कि जिन्हे आरक्षण दिया जा रहा है क्या उनकी स्थिति मैं कुछ सुधार हुआ और अगर उसके बाद उस वर्ग का विकास हो जाता है तो उसकी आगे कि पीड़ी को इस व्यवस्था का लाभ नहीं देना चाइये । क्यूंकि आरक्षण का मतलब बैशाखी नहीं है जिसके सहारे आजीवन जिंदगी जी जाये यह तो मात्र एक आधार है विकसित होने का ।

हम सभी देख रहे है कि न कोई सर्वेक्षण कि गयी थी और न ही कोई सर्वेक्षण कि जा रही है। जब B.R अंम्बेडकर ने खुद कहा था कि आरक्षण वैशाखी नहीं है फिर आज भी हर दस साल के बाद बिना सर्वेक्षण के बिना समीक्षा किये आरक्षण कि सीमा को आगे बड़ा दिया जाता है । ये समाज जो दो हिस्सों मैं बाँटने कि साजिश है । अगर किसी सरकार को पिछड़ी जाति के लोगो को सच में लाभ पहुंचना है तो वो सरकारी कॉलेज , ऑफिसेस में पिछड़ी जाति के लिए कुछ सीट्स अलग से रिज़र्व कर दे न के सामान्य जाति के लोगो के हक़ का गाला घोंटे । आज तक देश में एक व्यक्ति एक सविंधान क्यों लागू नहीं हुआ । कब तक हम जात – पात के नाम पर आरक्षण प्लेट में सजा कर देते रहेंगे । सामाजिक न्याय के नाम पर कब तक हम योग्य प्रतिभा का गाला घोंटते रहेंगे । कब तक ये वोट की गन्दी राजनीती चलती रहेगी । आरक्षण के नाम पर लगभग सभी पार्टिया एक मत है । अब तो ऐसा लगता है जैसे जब तक भ्र्ष्टाचार और राजनीति रहेगी तभी तक आरक्षण रहेगा ।

Areeba Khaan:

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